Sunday, April 21, 2019

दुनिया का सबसे ताकतवर शब्द है ‘एक्स्ट्रा’! Extra

दुनिया का सबसे ताकतवर शब्द है ‘एक्स्ट्रा’! Extra


एक जैसे काम के घंटे, एक जैसी शिक्षा, एक जैसे अवसर और एक जैसी शुरुआत करने के बाद भी कुछ लोग क्यों तेजी से तरक्की करते हैं और कुछ लोग क्यों पीछे रह जाते हैं? इसका राज यदि एक शब्द में कहा जाए तो वह है - "एक्स्ट्रा'। आइए इसे एक कहानी के माध्यम से समझते हैं।
                                   एक धनी आदमी के पास एक पुरानी नाव थी। उस व्यक्ति ने एक पेंटर को नाव को सुंदर और आकर्षक बनाने को कहा। पेंटर बेहद मेहनत और लगन से नाव को पेंट करने में तल्लीन हो गया। इसी दौरान उसने देखा कि नाव में एक छेद है। उसने बिना किसी से कुछ कहे ही उस छेद की मरम्मत की और पेंटिंग कर दी। दो- तीन दिन के बाद नाव का मालिक उसके घर आया, उसे खूब सारे कीमती तोहफे दिए और तय पारिश्रमिक से काफी ज्यादा भुगतान भी किया। पेंटर को इस मेहरबानी का कारण समझ में नहीं आया। 

नाव के मालिक ने बताया कि जिस दिन पेंटर अपना काम खत्म कर निकला, उसी दिन उसकी गैरमौजूदगी में उसके बच्चे नाव लेकर निकल गए। घर वापस आने पर वह यह जानकर कांप उठा। उसे पता था कि नाव में छेद है, लेकिन वह बच्चों को यह बताना भूल गया था। उसने जाकर देखा तो बच्चे नदी के बीच में आराम से नाव चला रहे थे। वह समझ गया कि हो ना हो, पेंटर ने ही नाव की मरम्मत की होगी। नाव मालिक ने पेंटर से पूछा कि उसका काम नहीं होने के बावजूद भी उसने यह क्यों किया? पेंटर ने उत्तर दिया, ‘मुझे लगा कि थोड़ी और मेहनत से यदि यह छेद भर जाए तो नाव सुंदर के साथ-साथ सुरक्षित भी हो जाएगी। मैंने थोड़ा एक्स्ट्रा काम कर दिया क्योंकि उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।’ यह कहानी आपसे पूछती है कि ज़िंदगी में आप कितनी बार एक्स्ट्रा करते हैं? क्या कभी किसी की मदद की? क्या कभी अपने बॉस की उम्मीद से ज़्यादा काम किया? क्या कभी किसी की तकलीफ़ में उसके सहभागी बने?

दुनिया में हर किसी को एक्स्ट्रा से बहुत प्रेम है। लोग ज़्यादातर खरीदारी किसी सेल के समय पर ही करते हैं, क्योंकि कुछ एक मिल रहा होता है। जो एक्स्ट्रा मनुहार करता है, उसे हम याद रखते हैं। जो स्टाफ एक्स्ट्रा मेहनत करता है, उसे मैनेजमेंट याद रखता है।

 जो कंपनी एक्स्ट्रा कमीशन देती है, स्टाफ उसको पसंद करता है। सच्चाई यह है कि दुनिया आपको हमेशा आपके ‘एक्स्ट्रा’ के लिए याद रखती है। जब हर कोई एक्स्ट्रा चाहता है तो जीवन में एक्स्ट्रा पाने के लिए आपको भी तो जीवन को एक्स्ट्रा देना पड़ेगा। 
                            आप भी आज ही स्वयं से प्रश्न कीजिए : मैं ऐसा क्या एक्स्ट्रा करता हूं जिसकी वजह से मेरा कस्टमर हमेशा मुझे याद रखेगा? मैं ऐसा क्या अपने बच्चों को एक्स्ट्रा दे रहा हूं, जिसकी वजह से वो कल सफल बनेंगे? मैं ऐसा क्या एक्स्ट्रा अपने समाज को दे रहा हूं, जिससे उन्हें गर्व महसूस हो? यदि आपको एक्स्ट्रा परिणाम चाहिए तो या तो काम बदलना पड़ेगा या काम करने का तरीका। अपने आसपास देखिए कि क्यों कुछ लोग तेजी से तरक्की कर रहे हैं? ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि वे कुछ तो खास और ज्यादा करते हैं, जो दूसरे लोग नहीं करते। तो आज से एक्स्ट्रा करने का प्रयास कीजिए। ऐसा करने से ही आपको एक्स्ट्रा मिलेगा और आप एक्स्ट्राऑर्डिनरी कहलाएंगे।

Thursday, April 18, 2019

किसी मुस्कान से होती है शांति की शुरूआत

विदेशों में कहावत है कि जब आप मुस्कुराते हैं तो आपकी आधी मुस्कान दूसरे के चेहरे पर होती है, लेकिन लगता है यह कहावत सही नहीं है। आपने अनुभव किया होगा कि जब-जब हम मुस्कुराते हैं, जरूरी नहीं कि सामने वाला मुस्कुराकर उत्तर दे। उसके चहरे पर शिकन भी आ सकती है। फिर यह कैसे संभव है कि मुस्कुराए हम और आधी मुस्कान सामने वाले के चेहरे पर गई।
                                     मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जैसे ही आप मुस्कुराए, 50 प्रतिशत तो आपकी हुई, लेकिन शेष 50 प्रतिशत प्रकृति में घुलकर सामने वाले तक पहुंचती है। यदि उसने स्वीकार नहीं भी की तो भी वह मुस्कान आप उसे दे चूके हैं। उसने नहीं स्वीकारा तो प्रकृति उसे लेकर दूसरों में बांट देती है। इसलिए जब भी मुस्कुराएं, यह मान लें कि आप पूरे संसार का भला कर रहे हैं। किसी एक
या दो व्यक्तियों का रिस्पॉन्स न मिलने पर निराश न होकर मुस्कान जारी रखिए।
                                                                                                            मनुष्य के लिए तो कहा गया है कि उसके मन को मुस्कान से डर लगता है, क्योंकि उसे गलत काम पसंद है। लेकिन दूसरे के मन को आपकी मुस्कान अच्छी लगेगी। क्योंकि मन का स्वभाव है कि अपना मालिक मुस्कुराए तो उसे लगता है कि
अब मैं नियंत्रण में आया, लेकिन दूसरे को मुस्कुराते देख उसे लगता है कि मुझे तो कोई फर्क पड़ नहीं रहा। मन निष्क्रिय हुआ कि आप शांत हुए। इसलिए शांति की शुरुआत किसी न किसी मुस्कान से होती है। मुस्कुराकर अपने आपको हैप्पी फेस इफेक्ट में लेकर आइए..। 

Sunday, April 14, 2019

inspirational quotes

यूरिपिडीस जन्म- सलामीस आइलैंड, ग्रीस निधन- मैकेडोनिया

प्राचीन ग्रीक त्रासदी लेखक थे। कुछ पुराने विद्वानों ने इन्हें 95 नाटकों के लिए जिम्मेदार ठहराया है,लेकिन सूदा के अनुसार नाटकों की संख्या 92 थी।


1. गुलाम वो होता है, जो अपना विचार बोल नहीं सकता। 

2. एक वफादार दोस्त दस हजार रिश्तेदारों के बराबर होता है। 

3. हाथ का काम खत्म किए बिना नए कार्य की योजना नहीं बनानी चाहिए। 

4. किस बात पर विश्वास नहीं करना है- यह समझदारी होना ही इंसान की बहुमलू्य विशेषता है। 

5. हर बात पर सवाल कीजिए। कुछ न कुछ जरूर सीखिए। जवाब कभी मत दीजिए।

 6. समझदारी की हमें बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। बुद्धिमानी तकलीफदेय है। 

7. मूर्ख से समझदारी की बात करेंगे तो वो आपको ही मूर्ख समझेगा। 

8. बुद्धिमान लोग शांत जीवन जीते हैं।

 9. तकलीफ में कौन दोस्त, दोस्त रहता है?







Saturday, April 13, 2019

सफर में जरूरी हैं ये चुनिंदा एटिकेट्स

सफर में जरूरी हैं ये चुनिंदा एटिकेट्स



 हाल में लंदन की एक अदालत ने एक महिला यात्री को छह महीने जेल की सजा सुनाई। इस महिला ने एयरइंडिया की मुंबई-लंदन उड़ान के क्रू मेंबर्स के साथ बदतमीज़ी की थी। संदेश साफ है। बदतमीज़ी करोगे तो खामियाज़ा भी भुगतोगे। अपनी जानिब-ए-मंजि़ल के सफर पर निकलने से पहले इस बार गौर करें कि आप खुद कैसे को-पैसेंजर हैं। बस, ट्रेन या जहाज़ में अपनी सीट पर ही बैठते हैं न, या इतना फैलकर कि आपकी कुहनी आर्मेरेस्ट की सीमा लांघती है?
                             बस अड्डे, प्लेटफार्म या बोर्डिंग एरिया में बैठें तो बाजू की सीट पर अपना लगेज रखने की बजाय उसे दूसरे यात्रियों के लिए छोड़ते हैं न? मोबाइल पर ज़रा हौले-हौले बात करिए, अजी अपना हाल-ए-दिल दूसरों को क्यों सुनाना। सब्र का दामन थामिए और अपने से आगे वाले यात्री को पहले चढ़ने, उतरने दीजिए। एस्केलेटर पर चलते हुए बाएं, वरना दाएं खड़े रहें। सफर में पूरा घर साथ लेकर चलने की ज़िद अच्छी नहीं। ‘लाइट ट्रैवलर’ बनकर तो देखिए। और बेशऊर पैसेंजर तो हरगिज़ न बनिए। एक्सपीडिया की एयरप्लेन एटिकेट रिपोर्ट,
                                      2018 में पिछली सीट के यात्री द्वारा अगली सीट को पकड़ना, खींचना, हिलाना प्रमुख परेशानी बताया गया है। दूसरे नंबर पर है पेरेंट्स द्वारा अपने उधम मचाते बच्चों की अनदेखी करना। जल, थल या आसमान में जहां जी चाहे सफर करिए, मगर इन दो बातों का भरपूर ख्याल रखिए। ट्रेन में रिज़र्व्डसीट पर कब्जा जमाने या मुंह अंधेरे ही भक्ति- रस का संचार करने वाले रेलयात्री भी न बनिए।
                                           प्लेन की सीट रिक्लाइन करने से पहले पीछे देख लें। और हां, ‘सॉरी’ और ‘शुक्रिया’ जैसे अल्फ़ाज़ इस दौर में भी मुफ्त हैं, उनके इस्तेमाल से कैसा परहेज़। सफर की तहज़ीब सीखिए, और हरेक के लिए सफर को खुशनुमा बनाइए।



Monday, April 1, 2019

इस बात से मत डरिए कि सामने वाला 'ना' कर देगा


अक्सर हमसे सवाल पूछा जाता है कि आपकी
सफलता का राज क्या है? कुछ लोग पूछते
हैं कि एलन मस्क या वारेन बफे की सफलता का राज
क्या है? ऐसा लगता है मानो हर कोई सफलता के पीछे
का रहस्य ढूंढ रहा है। क्या वाकई सफलता पाना मैथ्स
या केमिस्ट्री के किसी जटिल फॉर्मूले की तरह है या
सच्चाई कुछ और है? यह जानने के लिए एक छोटा-
सा काम कीजिए।

आप एक पेपर और पेन उठाकर पांच ऐसी खूबियां
लिखिए जो किसी भी व्यक्ति में सफलता पाने के
लिए होनी चाहिए। यही कार्य अपने परिवार के अन्य
सदस्यों और मित्रों से भी कराएं। अब सबकी सूची को
ध्यान से मिलाएं। यह देखकर आप अचरज में पड़ जाएंगे
कि अधिकांश लोगों ने एक ही तरह के उत्तर दिए हैं।
हमने अपनी रिसर्च में पाया है कि सबकी सूची में
लगभग 60 से 80 प्रतिशत तक खूबियां एक जैसी रहती
हैं। अधिकांश लोग कड़ी मेहनत, जुनून, प्रतिबद्धता,
टाइम मैनेजमेंट, जवाबदेही, ईमानदारी, सीखने का
जज़्बा जैसे उत्तर लिखते हैं। इसका अर्थ यह है कि
सफलता का कोई गुप्त रहस्य है ही नहीं। तो आज से
सफलता के रहस्य की तलाश बंद कर दीजिए। सिर्फ
दो सिद्धांतों को अपने मन में पक्का कर लीजिए :

पहला सिद्धांत: अपने लक्ष्य का..............
पीछा करते रहें… आपके आसपास ऐसे अनेक लोग होंगे जो असफलता
के डर से निर्णय नहीं लेते, लेकिन निर्णय ना लेने से
असफलता निश्चित है। यदि निर्णय ले लिया जाए
तो सफलता की भी संभावना बन जाती है। कुछ
न करके असफल होने से कुछ करके असफल हो
जाना अच्छा है, क्योंकि कम से कम मन में मलाल
तो नहीं रहेगा कि लक्ष्य के पीछेजाने का प्रयास ही
नहीं किया। दुनिया में सफलता उसी को मिली है, जो
अपने सपनों के पीछे गया है। घर बैठकर किसी ने
इतिहास नहीं रचा है। अभी उठिए और जुट जाइए,
ज्यादा किंतु-परंतु मत कीजिए, बहुत सारे लोगों से
सलाह मशविरा भी मत कीजिए, सीधे एक्शन में
आइए। परिणाम दिखने लगेंगे।

दूसरा सिद्धांत: ‘ना’ से घबराना छोड़..........
दीजिए, तो सफलता निश्चित है
हम अक्सर मदद मांगने से घबराते हैं, क्योंकि हमें
सामने वाले के मना करने का डर रहता है। हम
मार्गदर्शन लेने से घबराते हैं, हम टीम बनाने से
घबराते हैं, हम दूसरे से पूछने से घबराते हैं क्योंकि
हमें अपमान या नकारात्मक जवाब का डर होता है।
सच तो यह है कि दुनिया में बड़ेसे बड़े आदमी की
हैसियत ‘ना’ बोलने से ज़्यादा की नहीं होती। मैं
अक्सर मज़ाक में लोगों से कहता हूं कि यदि किसी
दिन मुकेश अंबानीजी आपको मिल गए और आपने
उनसे कह दिया कि एक दिन मैं आपका घर एंटिलिया
ख़रीदूंगा तो मुकेशजी ज़्यादा से ज़्यादा क्या करेंगे?
हंस देंगे या घूरकर देख लेंगे। और क्या कर सकते
हैं? क्या बिड़ला, अंबानी, नारायण मूर्ति, बिल गेट्स,
स्टीव जॉब्स जैसी हस्तियों को कभी ‘ना’ सुनने को
नहीं मिला होगा? क्या ये सब बिना ना सुने ही सफल
हो गए? जितने भी लोग सफलता के शिखर पर
पहुंचे हैं, उनकी सफलता की गाथा में बहुत सारी
असफलता की परतें हैं। आपको अगर दो-चार लोगों
ने ना बोल दिया तो कोई अत्याचार नहीं हो गया,
लेकिन सोचकर देखिए कि यदि दो तीन बार ‘ना’
बोलने के बाद ‘हां’ हो गया तो?
इस विषय पर जब हमने अपने चैनल पर वीडियो
रिलीज किया तो कुछ ही दिनों में 60 से भी अधिक
देशों में 30 लाख से ज्यादा लोगों ने इसे देखा। इससे
यह समझ में आया कि ‘ना’ का डर बहुत से लोगों में
हैं। साथियो, कुछ ना के बाद हां का आना निश्चित है,
कुछ लोगों से मदद मिलना निश्चित है, कुछ लोगों से
मार्गदर्शन मिलना निश्चित है तो फिर डर कैसा। आज
के बाद किसी ने ‘ना’ कह दिया तो अपने सपनों को
मत मारिए। दरवाजों पर दस्तक देते रहिए। कुछ आपके
लिए जरूर खुलेंगे।

Sunday, March 31, 2019

क्लोद मोने,Claude Monet

Claude Monet, क्लोद मोने,


एक फ्रेंच पेंटर थे। इनके बनाए लैंडस्केप्स सबसे ज्यादा पसंद किए जाते थे। फ्रेंच इंप्रेशनिस्ट पेंटिंग के संस्थापक भी थे।

1. लोग मेरी कला के बारे में चर्चा करते हैं और उसे समझने का ढोंग करते हैं, जैसे समझना जरूरी है। जरूरी केवल उससे प्रेम करना है।

 2. मैं युवाओं से कहना चाहता हूं कि उन्हें पेंटिंग करनी चाहिए, बिना इस डर के कि वो खराब बनेगी।

 3. यह दुखद है कि हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां शारीरिक साहस आम है, लेकिन नैतिक साहस की कमी है।

4. यदि आप किसी चीज़ को देख और समझ सकते हैं, तो आप उसे कर सकते हैं। 

Friday, March 29, 2019

दवा, दुआ और दौलत से स्वयं जुड़ना होगा ( To be connected with medicine, prayer and wealth.)

​​तीन बातें पांच तरीकों से साधी जा सकती
हैं। सुख और दुख सबकी जिंदगी में चलते ही रहते हैं। ये दोनों तीन बातों से जुड़े हैं- दवा, दुआ तथा दौलत और तीनों ही बातें जीवन में अलग-अलग रूप व ढंग से आती रहेंगी। तबीयत खराब हुई, दवा खानी पड़ेगी। समय-समय पर दूसरों की दुआ लेनी पड़ेगी, देनी भी पड़ेगी और दौलत का चक्कर तो चलता ही रहता है। इन तीनों बातों से जो सुख-दुख आता है, उसमें एक बात याद रखिए, ये तीनों काम स्वयं करिए। कुछ लोग तो दवा भी अपने हाथ से नहीं खाते। मैंने कई बार देखा है, पति बीमार है तो लंबे समय तक पत्नी ही दवा देती रहती है।
 एक बार तो मुझे एक भाई साहब ने कहा था कि मुझे तो मालूम भी नहीं है, कौन-सी दवा लेनी है। बस, पत्नी दे देती है, मैं खा लेता हूं। अरे, कम से कम अपनी दवा तो खुद लीजिए। दुआ भी खुद दीजिए और दौलत कमाने में भी अपना परिश्रम, अपनी रुचि बनाए रखिए। दूसरों के कंधे चढ़कर ये तीन काम कभी मत करिएगा। 
                 अब, जब खुद करने उतरेंगे तो फिर आपको पांच बातों पर ध्यान देना पड़ेगा- तरीका, रवैया, शैली, व्यवहार और स्वभाव। इन तीनों कामों में आपका तरीका क्या है? अपना रवैया भी स्पष्ट हो, व्यवहार विनम्र रहे और जीवनशैली संस्कृति, परंपरा व मूल्य आधारित हो। फिर अपने स्वभाव को जानिए। इसका मतलब है अपनी आत्मा पर टिकना। बस, ये पांच बातें उतरीं कि आपका होश जागा। तो दवा, दुआ तथा दौलत इन तीनों से स्वयं जुड़ें, यही सुख-दुख की कुंजी है..।

To be connected with medicine, prayer and wealth, three things can be in five ways
are Happiness and sorrow keep on walking in all their lives. These two are related to three things: medicine, prayer and wealth, and the three things will continue to come in a different way in life. The medicine has deteriorated, the drug will eat. From time to time, others will have to pray, to give to them, and to keep on the way of riches. Remember one thing about the joys and pains of all these three things. Some people do not even eat medicine with their own hands. I have seen many times, the husband is sick and for a long time, the wife continues to give the medicine.
 Once, I was told by a brother, that I didn't even know what medicine to take. He just gives the wife, I eat. Hey, at least take your medications yourself. Give yourself a prayer and keep your own interest in making money. By shouldering others, these three things will never work.

                 Now, when you get up, you have to pay attention to five things – the way, the attitude, the style, the behaviour and the temperament. What is your way in these three activities? Be clear in your attitude, be courteous and lifestyle culture, tradition and value based. Then know your nature. It means to tiggle over your soul. Just five things that will be your senses. So, it is the key to happiness and sorrow for all three of you...

दुनिया का सबसे ताकतवर शब्द है ‘एक्स्ट्रा’! Extra

दुनिया का सबसे ताकतवर शब्द है ‘एक्स्ट्रा’! Extra एक जैसे काम के घंटे, एक जैसी शिक्षा, एक जैसे अवसर और एक जैसी शुरुआत करने के बाद भी कुछ...