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Showing posts from November, 2018

Twitter Full Story in Hindi /''Jack Dorsey का सफलता मंत्र - आज ही शुरू करे , सफलता रातो रात नहीं मिलती , जोशीले बने और दुनिया को बदले ''

''Jack Dorsey का सफलता मंत्र - आज ही शुरू करे , सफलता रातो रात नहीं मिलती , जोशीले बने और दुनिया को बदले ''
Twitter की कहानी  13 वर्ष की उम्र में में रूचि , Taxi के लिए भी बनाया Software   Jack dorsey का जन्म में हुआ था .वे बचपन से काफी जिज्ञासु किस्म के इंसान थे .उनकी रूचि नक़्शो में थी खास तौर पर शहर के नक्शो में .जब घर में कंप्यूटर आया तो उन्होंने उसमें खुद के नक़्शे बनाये . वे घंटो तक पुलिस और एम्बुलेंस रेडियो फ्रेक्वीन्स सुनते थे, जिसके बाद वे दुर्घंट्ना स्थल या अस्प्ताल तक जल्दी से जल्दी पूछने वाले आपातकालीन वाहनों का मार्ग बनाते थे .

इस तरह 13 वर्ष की उम्र में ही Dispatch Routing में रूचि लेने लगे थे . उन्होंने taxi cab companies के लिए
Software बनाये , जो कारगार रहे . उन्होंने ने कहा,  में इस बारे में खेल रहा हूँ कि शहर कैसे काम करता है , इस लिए में इसे देख सकता था . बहरहाल खेल ही खेल में इन्होने इतना कुछ सिख लिया था की आगे चलकर एक Worldwide Company  खड़ी कर दी .

Twitter एक  नया विचार था , लेकिन इसके लिए नयी कंपनी स्थापित नहीं हुई .
ऑडियो के मालिक इवान विलियम्स भी जैक के…

1. रोशनी फैलाने के दो तरीके होते हैं। या तो मोमबत्ती बन जाइए या वह शीशा जिसमें उसका प्रतिबिंब दिखता है।

1. रोशनी फैलाने के दो तरीके होते हैं। या तो मोमबत्ती बन जाइए या वह शीशा जिसमें उसका प्रतिबिंब दिखता है।

2. जिंदा वही रह सकता है,जो बदलाव से डरता नहीं है, बड़ी चीजों में दिलचस्पी रखता है और छोटी चीजों से खुश हो जाता है।

3. जीवन में आधी परेशानियां, परेशानियां न होने का नाटक करने की वजह से होती हैं।

4. खामोशी के भी कई रंग हैं, शब्दों की ही तरह।

 5. जीवन या तो कसी हुई रस्सी की तरह है या नर्म पंखों का बिछौना है। मुझे कसी हुई रस्सी ज्यादा भाती है।

6. यात्रा के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि आपको पता चलता है कि दुनिया में शरीफ और विनम्र लोग कितने हैं।

किसी के बारे में तुरंत राय बनाना जल्दबाजी

किसी के बारे में तुरंत राय बनाना जल्दबाजी

लोग अपने आप को आकलित किया जाना पसंद नहीं करते, विशेषकर उन्हें जाने-पहचाने बगैर। वे चाहते हैं कि पहले उन्हें समझा जाए। इस समझदारी के साथ वे प्रशंसा, महत्व और अंत में प्रेम पाना चाहते हैं, लेकिन बिना निर्णायक हुए। हममें से अधिकांश लोग किसी के बारे में राय बनाना पसंद नहीं करते लेकिन ऐसा कई बार होता है, जब हम अपने पूर्वाग्रहों के साथ ही दूसरे व्यक्ति को देखते हैं।

हम शायद ही ये समझते हैं कि किसी व्यक्ति के बारे में राय बनाना या उसे दोषी सिद्ध करने का परिणाम हमारे ऊपर भी वैसा ही हो सकता है, जैसा कि दूसरे व्यक्ति पर। इस तरह हम तनावग्रस्त भी हो सकते हैं। निर्णय पर पहुंचने, अंतिम राय बनाने और दोषारोपण करने की आदत को खत्म करने का एक ही तरीका है- प्रशंसा करना।             प्रशंसा भी व्यक्ति के प्रदर्शन को बेहतर बनाती है, साथ ही मस्तिष्क की सूचनाओं को समझाने की क्षमता भी बेहतर करती है। जब आप अपने आप को किसी अंतिम निर्णय की ओर पहुंचने की जल्दी का अनुभव करें, तो दिमाग के दरवाजे खोलें और तारीफ करने लायक बातें तलाशें। इस तरह आप दूसरों को, उनकी बातों को और उ…

वस्तुओं से ज्यादा जरूरतों को महत्व दें

वस्तुओं से ज्यादा जरूरतों को महत्व दें
 आजकल एक आदर्शवाक्य बहुत चलता है- ‘आमदनी के हिसाब से खर्च करो न करो, खर्च के हिसाब से आमदनी जरूर बना लो’। वैसे परिश्रमी व्यक्ति के लिए यह बात अच्छी है कि अपने खर्च के हिसाब से आमदनी बढ़ा लेनी चाहिए।

आमदनी बढ़ाने का मतलब है बड़े लक्ष्य के साथ कठोर परिश्रम करते हुए अधिक से अधिक धन कमाना। यहां तक तो ठीक है, लेकिन केवल खर्च बढ़ाने के लिए आमदनी बढ़ाई जाए इसमें भोग और विलास का बड़ा खतरा है। यदि आप शांति की तलाश में हैं तो चीजों से अधिक जरूरतों को महत्व दीजिए। जरूरत की सीमा लांघी तो जीवन में भोग-विलास प्रवेश कर जाएंगे। इस खतरे से बचना हो तो अपने भोगविलास को दो बातों से जोड़िए- पहली आपकी सीमाएं और दूसरी आपकी आयु। यदि आपने भोग और विलास को उम्र से ठीक से नहीं जोड़ा तो रोग आने में देर नहीं लगेगी, क्योंकि भोग बहुत जल्दी रोग में बदलता है।

उम्र का तालमेल नहीं बैठा तो ऐसा रोग लगेगा कि भोग महंगा पड़ जाएगा। रोग भी दो तरह के होते हैं- मानसिक और शारीरिक। यदि आप आमदनी के हिसाब से खर्च करेंगे तो मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे और खर्च के अनुसार आमदनी तय कर रहे होंगे तो म…

दुनिया कठिनाइयों से भरी हुई है। जिसे खुद पर भरोसा है, वही विजेता कहलाता है। - गुरु नानक देव जी

दुनिया कठिनाइयों से भरी हुई है। जिसे खुद पर भरोसा है, वही विजेता कहलाता है। - गुरु नानक देव जी

Intersting - अहंकार खत्म कर शांति प्रदान करता है गुरु

अहंकार खत्म कर शांति प्रदान करता है गुरु
इन्सान की ज़िंदगी में जब भी कोई बात उतरेगी तो दो तरीके से उतरेगी। शास्त्रों में इसे ‘उभयभांति’ कहा है। अपने आसपास कहीं भी निगाह दौड़ा लीजिए, हर बात में दो ढंग या तरीके दिखेंगे। जैसे यदि कुछ गलत है तो उसके पीछे सही भी है। कानून है तो अपराधी भी रहेगा। कोई मालिक है तो सेवक भी होगा, दुकानदार के साथ ग्राहक भी जुड़ा होगा। इस प्रकार जीवन दो तरीके से उतरता है। इन सब में सुंदर ढंग है गुरु और शिष्य का। जबजब भी अवसर आए, शिष्य बनकर कोई गुरु जीवन में जरूर रखिए।

गुरु की सबसे बड़ी विशेषता है कि वह शिष्य को अहंकार शून्य कर देता है। पाप से, संसार से मुक्ति ये सब बातें गौण हैं। अहंकार शून्य होने के लिए आपके अलावा गुरु की ताकत लगेगी जो है मंत्र। गुरु मंत्र द्वारा पहले धीरे से छूता है। जैसे ही गुरु आपके अहंकार को छूता है, आपको लगता है हमें मान और प्रेम मिल रहा है। हो सकता है शुरू में यह बात अहंकार को और बढ़ाए।

फिर धीरे से गुरु अपने मंत्र द्वारा आपको पकड़ता है। तीसरे चरण में सहलाता है और चौथे चरण में तोड़ देता है। अहंकार टूटा कि आप परमशक्ति के निकट पहुंचे, जिसका …