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Showing posts from January, 2019

ऋषि की तपस्या और ज्ञान

एक ऋषि ने लम्बी साधना करने के बाद बड़ा ज्ञान हासिल किया । उसकी साधना से खुश होकर और ज्ञान से प्रभावित हो कर शिव जी प्रगट हुए और कहा तेरी साधना से खुश हो कर में तुम्हे वरदान देने आया हु । तू जो चाहेगा वो मिलेगा । ऋषि ने शिव से कहा मेरा ज्ञान दुगना हो जाए । शिव जी ने कहा हो गया। शिव जी ने कहा की ऋषि ने और कुछ पदार्थ तो माँगा नहीं । ज्ञान ही मांगा। शिव ने कहा कुछ और मांग । ऋषि ने कहा , मेरा ज्ञान दुगना के दुगना हो जाए ।  जैसे ने ही शिव ने कहा हो गया वो ऋषि से इश्तरी बन गयी ।

एक शिकायत फ़रियाद होती है और एक शिकायत चुगली होती है फ़रियाद करनी ठीक है , चुगली करनी गलत है । चुगली सुरु से ही झूठ होती है और सुनने वालो की मानसिक स्थिति को ध्यान में रख कर बोली जाती है

एक शिकायत फ़रियाद होती है और एक शिकायत चुगली होती है
फ़रियाद करनी ठीक है , चुगली करनी गलत है । चुगली सुरु से ही झूठ होती है और सुनने वालो की मानसिक स्थिति को ध्यान में रख कर बोली जाती है

में उतना झूठ नहीं बोलै जाता जितना असल बात को तोड़ने- मरोड़ने पर ध्यान दिया जाता है

essay contest / एस्से कॉन्टेस्ट में जीतें लंदन जाने का अवसर

essay contest  
एस्से कॉन्टेस्ट में जीतें लंदन जाने का अवसर

द रॉयल कॉमनवेल्थ सोसायटी द्वारा आयोजित क्वीन्स कॉमनवेल्थ एस्सेकॉन्टेस्ट दुनिया का सबसे पुराना इंटरनेशनल राइटिंग कॉम्पिटीशन है। हर साल यह कॉमनवेल्थ देशों के अठारह साल से कम के यूथ को मौका देते हैं कि वे शब्दों के माध्यम से भूत, भविष्य और वर्तमान की स्थितियों के बारे में अपने विचार लिखकर भेजें। इस कॉम्पिटीशन के लिए एंट्रीज भेजने के लिए स्टूडेंट्स को दिए गए विभिन्न विषयों में से किसी एक पर निबंध लिखना होगा। इस कॉन्टेस्ट में भाग लेने के लिए दो श्रेणियां हैं। पहली 14-18 साल के छात्रों की सीनियर कैटेगरी और दूसरी 14 साल से कम के स्टूडेंट्स की जूनियर कैटेगरी। प्रतिभागी को अपनी कैटेगरी के अनुसार चुने गए विषयों में से किसी एक पर अंग्रेजी भाषा में 1500 शब्दों में निबंध लिखना होगा। इसमें जीतने वाले कुल चार विजेताओं को एक हफ्तेके लिए एजुकेशनल और कल्चरल इवेंट्स के लिए लंदन जाने का मौका मिलेगा। कॉम्पिटिशन की थीम ए कनेक्टेड कॉमनवेल्थ रखी गई है। इसमें भाग लेने के लिए आपको 1 जून, 2019 से पहले अपने एंट्री भेजनी होगी। एंट्रीज ऑफलाइन और ऑनलाइन दो…

सचिन बंसल ने ओला में 150 करोड़ रुपये का निवेश किया

सचिन बंसल ने ओला में 150 करोड़ रुपये का निवेश किया

नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापक सचिन बंसल ने ऑनलाइन कैब प्लेटफॉर्म ओला में करीब 150 करोड़ रुपये का निवेश किया है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के पास मौजूद दस्तावेज से यह जानकारी मिली है। दस्तावेज के मुताबिक, "बंसल ने ओला के 70,588 पूरी तरह और अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय संचयी 'जे श्रृंख्ला' के तरजीही शेयर खरीदे।" इस तरह से बंसल ने करीब 150 करोड़ रुपये का निवेश किया। वॉलमार्ट द्वारा फ्लिपकार्ट का अधिग्रहण करने के बाद सचिन बंसल ने उस कंपनी से किनारा कर लिया है।

What is diabetes?

What is diabetes?
Diabetes is a condition in which the body’s ability to process blood glucose is damaged. It is a metabolic disease that causes high blood sugar as the body can’t make or use enough insulin effectively! This condition is broadly divided into three types: 
1. Type 1 diabetes: It is the type of diabetes in which the body fails to produce insulin. To stay alive, patients of type 1 diabetes are needed to take artificial insulin every day. 
2. Type 2 diabetes: This condition affects the way the body uses insulin, which makes it hard to use the available insulin effectively! 
3. Prediabetes: It occurs when the blood sugar levels are higher than normal but not high enough to be considered as diabetes. 

Indian diet plan for type 2 diabetes
1. Replace white rice with brown rice
The Indian diet is incomplete without white rice, but, white rice has a high GI, which makes it unhealthy for people with diabetes. On the other hand, brown rice may not be as tasty as white rice but they are …

Entrepreneur के लिए फायदेमंद होंगे ये ब्लॉग्

Entrepreneur के लिए फायदेमंद होंगे ये Bloggs

इंटरनेट के महत्व को समझते हुए बहुत से बिजनेस ऑनलाइन अपनी जगह बना रहे हैं। हालांकि कंपनीज के अपने वेबसाइट्स और ब्लॉग्स हैं, लेकिन वे बिजनेस को बढ़ाने में किस तरह से मदद कर सकते हैं, यह लगातार सीखने वाला विषय है। ऐसे कई ब्लाग्स हैं जो खासतौर पर बिजनेस वर्ल्ड में आने वाले नए आंत्रप्रेन्योर्स की मदद के लिए बनाए गए हैं। इनमें से कई ब्लॉग्स प्रोफेशनल्स ने तैयार किए हैं जो बिजनेस को ग्रो करने के आपको कई तरीके सिखा सकते हैं।


गाय कावास्की (Guy Kawasaki) 

पूर्वमें एप्पल के इवेंजलिस्ट और वेंचर कैपिटलिस्ट रहे कावास्की एक सफल लेखक भी हैं। कई कंपनीज को अपनी वीसी फर्म के माध्यम से फंडिंग करने और बहुत से ऑनलाइन वेंचर शुरू करने का अनुभव रखने वाले कावास्की से बहुत कुछ सीखा जा सकता है।

 ब्लॉगत्रेप्रेन्योर (Blogtrepreneur)

 इस ब्लॉग में एडम टॉरेन और मैथ्यू टॉरेन आंत्रप्रेन्योरियल स्पिरिट की बात करते हैं। इसके अलावा वे नए वेंचर के क्रिएशन, इनोवेशन, बिजनेस ग्रोथ टेक्नीक्स, स्ट्रैटजी मैनेजमेंट जैसे विषयों पर रिसर्च करते हैं और ब्लॉग के माध्यम से सिखाते हैं।

अंडर 30 स…

आपकी ऑनलाइन सेल्स बढ़ाने में कारगर साबित होगा यू-ट्यूब मार्केटिंग कैंपेन

आपकी ऑनलाइन सेल्स बढ़ाने में कारगर साबित होगा यू-ट्यूब मार्केटिंग कैंपेन यदि आप भी अपनी ई-कॉमर्स वेबसाइट पर ट्रैफिक बढ़ाने के बारे में सोच रहे हैं तो यू-ट्यूब का मार्केटिंग कैंपेन इसमें आपकी मदद करते हुए ऑनलाइन सेल्स को बढ़ा सकता है। आपकी सहायता करने में ये टिप्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 


क्यों बेहतर है ELSS में निवेश?

क्यों बेहतर है ELSS में निवेश ? 

टैक्स पेयर्स की सबसे ज्यादा दुविधा 80 सी के तहत सालाना 1.5 लाख रुपए तक की टैक्स में छूट के लिए उपलब्ध विभिन्न विकल्पों के चुनाव पर होती है। 80 सी के तहत लाइफ इंश्योरेंस, पीपीएफ, एनएससी, सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम, एफडी, एनपीएस, यूलिप, ईएलएसएस आदि में निवेश करने पर टैक्स में छूट मिलती है। इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम्स (ईएलएसएस) इन सभी विकल्पों में अकेला ऐसा विकल्प है जिसमें करीब पूरा निवेश इक्विटी में होता है। बाकी के दो विकल्प मसलन एनपीएस और यूलिप में इक्विटी में सीमित एक्सपोजर है। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि टैक्स में छूट के साथ-साथ लांग टर्म में इक्विटी में निवेश से बेहतर रिटर्न भी मिले तो ईएलएसएस एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

क्या है ईएलएसएस (ELSS)?
 ELSS एक टैक्स सेविंग डाइवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम है जिसमें फंड मैनेजर आपकी रकम को अलग-अलग साइज की कंपनियों के शेयरों में निवेश करता है। लेकिन डाइवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम की तरह इसे जब चाहें बंद नहीं कर सकते। किसी भी अन्य म्यूचुअल फंड की तरह आप 500 रुपए से इसमें एसआईपी (सिप) शुरू कर …

ध्यान को दो श्वासों के बीच केन्द्रित रखिए...

सांसारिक कामों में संलग्न रहते हुए, अवधान को दो श्वासों के बीच टिकाएं और शांति को पाएं। यह विधि श्वास पर आधारित है। श्वास के विभिन्न उपयोग द्वारा आप मन की गहराइयों में उतर सकते हैं। यद्यपि यह श्वास की विधि है, इसकी खूबी यह है कि आप श्वास के ऊपर ध्यान न दें, उल्टे आती-जाती श्वास को भूल जाएं और दो श्वासों के बीच के अंतराल पर ध्यान दें। जैसे एक श्वास भीतर आती है, इसके पहले कि उसे बाहर छोड़ा जाए, वहां एक अंतराल होता है।
                            उस अंतराल पर ध्यान देना है। फिर आप श्वास बाहर छोड़ते हैं, और उसके बाद श्वास भीतर आती है। इन दो श्वासों के बीच भी एक हल्का सा अंतराल अर्थात् गैप होता है। चूंकि हम उस पर ध्यान नहीं देते, हमें उसका कभी पता नहीं चलता। लेकिन वह अंतराल मन की शांति का द्वार बन सकता है। उस अंतराल में मन स्थिर रहता है। उस स्थिरता को लंबा किया जा सकता है, थोड़े से अभ्यास की जरूरत है बस। दूसरी खूबी, यह ध्यान आप काम करते हुए ही कर सकते हैं: जैसे खाना बना रहे हैं, कोई वाहन चला रहे हैं, सड़क पर चल रहे हैं, इन क्रियाओं के बीच श्वास की खाली जगह का होश रखना है।
                   …

सफलता में एक बड़े निवेश की तरह होता है त्याग

सफलता में एक बड़े निवेश की तरह होता है त्याग  

कहा जाता है कि बिना जोखिम के लाभ कमाना, बिना खतरे के अनुभव पाना और बिना काम किए पुरस्कार की उम्मीद करना लगभग उतना ही असंभव है जितना कि बिना पैदा हुए जिंदा रहना। इस प्रेरणादायी कथन में हमें सफल जीवन की एक अनिवार्य शर्त भी मिलती है।
            वह यह कि बिना त्याग किए सफलता नहीं मिलती। लेकिन त्याग को अक्सर गलत समझा जाता है। अधिकांश लोगों के लिए त्याग का मतलब होता है अपना समय या पैसा देना। कुछ लोगों के लिए त्याग का मतलब मुश्किलें झेलना या कोई अप्रिय काम करना भी है। लेकिन त्याग किसी अधिक कीमती चीज को पाने के लिए भी किया जाता है।
                      त्याग की असल परिभाषा है- किसी मूल्यवान वस्तुके लिए अपना धन, समय, ऊर्जा देना जिससे कि बदले में अधिक मूल्यवान वस्तु, अधिक धन या बेहतर जीवनस्तर प्राप्त हों। आसान शब्दों में त्याग का अर्थ होता है बाद में बहुत कुछ हासिल करने के लिए अभी थोड़ा देना। त्याग, सफलता के लिए किया गया निवेश भी है।

छह साल पहले सात कारों से शुरू हुई थी ‘ZOOM CAR

छह साल पहले सात कारों से शुरू हुई थी ‘ज़ूम कार'


लगभग सात साल पुरानी बात है, जब दो अमेरिकी दोस्त, डेविड बैक और ग्रेग मोरन एक बार में बैठे हुए थे। दोनों में ही एक बात समान थी, अपना कुछ शुरू करने की इच्छा। बातों ही बातों में दोनों एक बात पर सहमत हुए कि भारत में कोई "शॉर्ट टर्मकार रेंटल' सर्विस नहीं है। दोनों को ही यह एक मौका दिखा।

            दोनों ने अपने आसपास के लोगों से इस बारे में चर्चाकी तो ज्यादा सकारात्मक बातें सामने नहीं आईं। लोग कह रहे थे कि भारत में कार स्टेटस सिंबल है, शेअर कौन करेगा... पूंजी बहुत लगेगी... ट्रैफिक खराब है, एक्सिडेंट बहुत होते हैं... तमाम सरकारी इजाज़तें लेना बहुत मुश्किल है। फिर भी कोई बड़ा प्लेअर इस मार्केट में नहीं था, तो डेविड और ग्रेग को भरोसा था कि "ज़ूम कार' को कामयाबी मिलेगी।
                                    इस सोच के साथ, यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया के ये दो ग्रैजुएट्स 2013 में भारत आ गए। इस तरह के बिजनेस को रजिस्टर कराने के लिए कम से कम 50 कारों का उस व्यक्ति के नाम होना जरूरी है, वो भी तमाम शर्तों के साथ। इस समस्या से निजात…

Skills

इन फ्यूचर Skills को सीखने पर हो फोकस लिं
क्डइन की हाल में आई एक रिसर्च के
अनुसार 2019 में कंपनीज में हार्ड स्किल्स के साथ-साथ बहुत सी सॉफ्टस्किल्स की भी डिमांड रहेगी। हार्ड स्किल्स में जहां डेटा, ऑटोमेशन और क्लाउड कम्प्यूटिंग की भारी जरूरत रहेगी वहीं सॉफ्ट स्किल्स को भी
नजरअंदाज नहीं किया जा सकेगा।
लिंक्डइन पर मौजूद 57 प्रतिशत
लीडर्स यह मानते हैं कि दोनों ही तरह
की स्किल्स होना जरूरी हैं। कम्युनिकेशन को मजबूत करें हाल ही में आई एनुअल लिंक्डइन इमर्जिंग जॉब्स रिपोर्ट के अनुसार जॉब मार्केट में जिस स्किल की सबसे अधिक कमी रहती है वह है कम्युनिकेशन। ऐसे में एम्प्लॉयर्स ऐसे टीम मेंबर को आगे बढ़ाते हैं जो दूसरी टीम्स से कम्युनिकेट कर सकता हो, रिपोर्ट लिख सकता हो और मीटिंग्स में प्रेजेंटेशन भी दे सकता हो। अत: वह मेंबर आप बन सकें, इसके लिए बात करने, लिखने और प्रेजेंटेशन से जुड़ी स्किल्स पर काम करते रहें। टीम लीड करें और जिम्मेदारी लें अगर आप 2019 में तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं तो कम्युनिकेशन के अलावा आपको अपनी टीम बनाने पर भी फोकस करना होगा। अपनी टीम को आगे बढ़ने में मदद करने के अलावा, टीम के …

जो दिल से निकलता है, वही दिल तक पहुंचता है।

1. सामान्य ज्ञान की असामान्य मौजूदगी को ही दुनिया बुद्धिमानी कहती है।  2. मैं अक्सर सोचता हूं कि बच्चों के बिना ये दुनिया कितनी उदास होती और बुजुर्गों के बिना कितनी निर्दयी।  3. प्रेम, फूल की तरह होता है और पेड़ की छांव की तरह होती है, दोस्ती।  4. जो दिल से निकलता है, वही दिल तक पहुंचता है।  5. मैंने सहनशीलता के समर्थन में होने वाली असहनशीलता बहुत देखी है।  6. खामोशी हमेशा ही बुद्धिमानी नहीं दर्शाती।  7. आज में ही कल भी शामिल है।  8. कोई भी कविता तब अच्छी लगती है, जब उसे व्यापक रूप से समझा जाए, संपूर्णता के साथ नहीं।  9. बिना उत्साह के कभी कुछ महान हासिल नहीं किया गया है।  10. बुरा रोकने के लिए बुरा करना ठीक नहीं।

Skills

इन फ्यूचर Skills को सीखने पर हो फोकसलिं
क्डइन की हाल में आई एक रिसर्च के
अनुसार 2019 में कंपनीज में हार्ड स्किल्स के साथ-साथ बहुत सी सॉफ्टस्किल्स की भी डिमांड रहेगी। हार्ड स्किल्स में जहां डेटा, ऑटोमेशन और क्लाउड कम्प्यूटिंग की भारी जरूरत रहेगी वहीं सॉफ्ट स्किल्स को भी
नजरअंदाज नहीं किया जा सकेगा।
लिंक्डइन पर मौजूद 57 प्रतिशत
लीडर्स यह मानते हैं कि दोनों ही तरह
की स्किल्स होना जरूरी हैं।कम्युनिकेशन को मजबूत करें हाल ही में आई एनुअल लिंक्डइन इमर्जिंग जॉब्स रिपोर्ट के अनुसार जॉब मार्केट में जिस स्किल की सबसे अधिक कमी रहती है वह है कम्युनिकेशन। ऐसे में एम्प्लॉयर्स ऐसे टीम मेंबर को आगे बढ़ाते हैं जो दूसरी टीम्स से कम्युनिकेट कर सकता हो, रिपोर्ट लिख सकता हो और मीटिंग्स में प्रेजेंटेशन भी दे सकता हो। अत: वह मेंबर आप बन सकें, इसके लिए बात करने, लिखने और प्रेजेंटेशन से जुड़ी स्किल्स पर काम करते रहें।टीम लीड करें और जिम्मेदारी लेंअगर आप 2019 में तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं तो कम्युनिकेशन के अलावा आपको अपनी टीम बनाने पर भी फोकस करना होगा। अपनी टीम को आगे बढ़ने में मदद करने के अलावा, टीम के काम…

कैसे रहें ज्यादा खुश?

कैसे रहें ज्यादा खुश? 

खुश रहने के लिए कोई रॉकेट साइंस नहीं है। बस, अपने दिमाग पर ज़ोर डालिए और ढूंढ लीजिए खुश रहने का कोई न कोई तरीका। एक कॉपी और पेन लीजिए और बैठ जाइए कभी फुर्सत में और लिखना शुरू कीजिए। कौन-सी बातें आपकी ख़ुशी में खलल डालती हैं। उनमें से जिन बातों या कारणों को हटा सकते हैं, हटा दीजिए। जो नहीं हटा सकते, उनको कुछ बर्दाश्त कीजिए और बिना ज़्यादा परेशान हुए उनसे बाहर निकलने के तरीके सोचिए। मगर सबसे ज़रूरी है कि आप साथ ही यह भी लिख डालें कि आपको क्या बिलकुल खुश कर देता है और वो जो कुछ भी है, उसे करना शुरू कर दीजिए - सिनेमा देखना, किताबें पढ़ना, मित्रों से बातचीत करना, बच्चों के साथ खेलना इत्यादि कुछ भी। खुश रहने का एक कारण तो मिल ही जाएगा।

दूध पीने के 5 नियम

दूध को सुपर फूड माना गया है। हमारे यहां आयुर्वेद में भी इसकी काफी अहमियत बताई गई है। यह कई तरह के पोषक तत्वों जैसे कैल्शियम, प्रोटीन, आयोडीन, पोटैशियम, फॉस्फोरस, विटामिन बी-12 और विटामिन बी-2 का अच्छा सोर्स है। इसलिए यह अपने आप में एक पूर्ण आहार भी है। नियमित तौर पर रोजाना दूध लेने से ताकत और रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ती है। लेकिन दूध पीने के भी कुछ नियम हैं। आज हम कुछ इन्हीं नियमों की बात करते हैं।

1. कब पिएं दूध? 
दूध पीने का सबसे बेहतर समय रात को सोने से पहले का है। डिनर के कम से कम एक घंटे बाद गुनगुना दूध पीने से न केवल दिनभर का तनाव दूर होता है, बल्कि तनाव दूर होने से नींद भी अच्छी तरह से आती है। सुबह के समय दूध लेने से उसे पचाने में दिक्कत होती है। कई लोगों को इससे गैस की प्रॉब्लम भी हो सकती है। हालांकि बच्चे सुबह के समय दूध पी सकते हैं क्योंकि दिनभर सक्रिय रहने के कारण उनमें पाचन संबंधी समस्या नहीं होती।

2. कैसे पिएं दूध? 
गुनगुना और ठंडा दूध दोनों के अपने-अपने फायदे हैं। अगर आप सामान्य फायदों जैसे कैल्शियम, फॉस्फोरस आदि पोषण तत्व हासिल करना या इम्युनिटी बढ़ाना चाहते है…

दो भाई

दो भाई 
दो भाईथे। आपस में बहुत प्यार था। खेत अलग-अलग थे, पर आजू-बाजू में। बड़ा भाई शादी-शुदा था। छोटा अकेला। एक बार खेती बहुत अच्छी हुई। अनाज बहुत हुआ। खेत में काम करते-करते बड़े भाई ने बगल के खेत में मौजूद छोटे भाई को खेत की निगरानी रखने को कहा और खुद खाना खाने चला गया। उसके जाते ही छोटा भाई सोचने लगा, इस बार खेती तो अच्छी हुई। अनाज भी बहुत हुआ है। मैं तो अकेला हूं, लेकिन बड़े भाई की तो गृहस्थी है। मेरे लिए तो अनाज ज़रूरत से ज़्यादा है। भैया के साथ तो भाभी और तीन बच्चे हैं, उन्हें अनाज की ज़रूरत ज़्यादा है। ऐसा विचार कर उसने 10 बोरे अनाज बड़े भाई के अनाज के ढेर में डाल दिए। बड़ा भाई भोजन करके आता है, तो उसके आते ही छोटा भाई भोजन के लिए चला जाता है। छोटे भाई के जाते ही बड़ा भाई विचारता है कि मेरा गृहस्थ जीवन तो अच्छे से चल रहा है। छोटे को तो गृहस्थी जमानी है। ऐसा विचार कर उसने 10 बोरे अनाज छोटे भाई के खेत में लगे अनाज के ढेर में डलवा दिए। दोनों भाई मन ही मन खुश थे। अनाज उतना का उतना ही था, लेकिन प्यार बढ़ गया था। शकुंतला तिवारी

GST UPDATE 2019/ ...40 लाख रुपए तक सालाना कारोबार पर एक अप्रैल से जीएसटी रजिस्ट्रेशन नही

40 लाख रुपए तक सालाना कारोबार पर एक अप्रैल से जीएसटी रजिस्ट्रेशन नही
फैसला इसलिए: 40 लाख रु. तक टर्नओवर वाले कारोबारियों से कुल टैक्स का सिर्फ 1.6% मिलता है

नई दिल्ली | छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए जीएसटी काउंसिल ने दो फैसले किए। पहला- जीएसटी में रजिस्ट्शन से छूट की सीमा 20 लाख रे से बढ़ाकर 40 लाख कर दी। अभी कुल जीएसटी कलेक्शन में 40 लाख रु. तक टर्नओवर वालों का हिस्सा सिर्फ 1.6% है। इसलिए रजिस्ट्शन रे से छूट की सीमा बढ़ाने का टैक्स कलेक्शन पर खास असर नहीं होगा। वहीं करीब 61 लाख कंपनियों-फर्मों को राहत मिलेगी। अभी जीएसटी के तहत 1.2 करोड़ कंपनियां रजिस्टर्ड हैं। सीमा बढ़ने से 60% कंपनियों को रजिस्ट्शन रे की जरूरत नहीं होगी। क्योंकि, इनका सालाना टर्नओवर 40 लाख से कम है। फैसला 1 अप्रैल 2019 से लागू होगा।

कंपोजीशन लिमिट 1 करोड़ से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रु. की दूसरा फैसला कंपोजीशन स्कीम की सीमा एक करोड़ से 1.5 करोड़ करने का किया। इस स्कीम में कारोबारियों को पूरे टर्नओवर पर 1% टैक्स देना पड़ता है। ये सालाना रिटर्न भर सकेंगे। टैक्स हर तिमाही जमा करना पड़ेगा।
                               50 लाख तक सर…
जब दुनिया यह कहती है कि हार मान लो, तब आशा धीरे से कान में कहती है कि एक बार फिर से प्रयास करो।

LIST

आज फिर यही शर्ट। चार दिन
पहले ही तो पहनी थी। तुम्हें पता
नहीं मै कपड़े जल्दी रिपीट नहीं करता।'
‘दो महीने हुए होंगे जब आपने इसे पहना था।'
‘अच्छा डायरी मे नोट करती हो क्या?'
‘नाश्ते में आमलेट! बताया था न मेरा पेट ठीक नहीं है।
कुछ हल्का बनाना।
‘पर आपने ही कहा था कि नाश्ते में...।'
‘कान साफ़ रखा करो अपने।'
‘ये सिर पर पल्ला लिए क्यों घूमती हो। दस साल बड़ी
लगती हो मुझसे।'
‘अम्माजी कहती हैं।'
‘वाह, जैसे सारी बातें अम्मा की मानती हो।'
‘अम्मा को चाय के साथ टोस्ट क्यों दे दिया, उनको
एसिडिटी होती है।'
‘बिस्किट उन्हें अच्छे नहीं लगते। टोस्ट उन्होंने ही मांगा
था।'
‘पर तुम्हें तो अक्ल है न। है कि नहीं?'
‘यार तुम भी न। फिर ये हरी साड़ी पहन ली, बन गई
तोता परी।'
‘आप ही तो कहते हैं, मुझ पर यह साड़ी अच्छी लगती है।'
‘कभी कहा होगा। अब अच्छी नहीं लगती।'
‘अख़बार दे दो, ज़रा ख़बर देखूं। फिर तैयार होता हूं।'
‘बाबूजी पढ़ रहे हैं।'
‘वो बाद में भी देख सकते हैं।'
‘अरे! आप ही तो कहते है कि अख़बार पहले बाबूजी
को दिया करो। अब हमें क्या पता था कि आज आपको पहले
पढ़ना है।'
‘…

भाषण देते हुए मुख्य विचार और लक्ष्य बेहद स्पष्ट होने चाहिए

भाषण देते हुए मुख्य विचार और
लक्ष्य बेहद स्पष्ट होने चाहिए
भाषण देने से पहले दिमाग में तीन बातें स्पष्ट होनी चाहिए- मुख्य विचार,
ऑडियंस और लक्ष्य। शुरुआत अपने विचार पर फोकस करके की जा सकती
है। तय करें कि आपको सुनने वाले कौन होंगे और इसी के अनुसार अपनी
स्पीच लिखें। अगर आप छोटे मंच पर बोलने जा रहे हैं, तो वाक्य व्यक्तिगत
रखे जा सकते हैं। किसी कॉन्फ्रेंस में प्रोफेशनल्स के बीच हैं, तो तकनीकी
भाषा का उपयोग किया जा सकता है। ये ध्यान रखना जरूरी है कि आपका
लक्ष्य सभी को पता चल जाए। हो सकता है आप ये भी चाहें कि श्रोता आपकी
कही बात को अन्य लोगों तक पहुंचाएं।
(टू गिव अ ग्रेट प्रेजेंटेशन, डिस्टिल यॉर मैसेज टू जस्ट 15 वर्ड्स, ट्रीशिया ब्रोक)

Sunday Box (हमें वो गाने सबसे ज्यादा पसंद आते हैं, जो हमारी उदासी भांप लेते हैं।)

1. हम जितना ज्यादा पढ़ते हैं, उतना ही अपनी
अज्ञानता से वाकिफ हो जाते हैं।
2. जीवन उड़ान नहीं भर सकता लेकिन बदल
सकता है। उम्मीद कम हो सकती है, लेकिन
मर नहीं सकती। सच उजागर होकर भी
छिपा रह सकता है।
3. हमें वो गाने सबसे ज्यादा पसंद आते हैं, जो
हमारी उदासी भांप लेते हैं।
4. ना तो भविष्य का डर होना चाहिए और ना
ही अतीत के लिए कभी रोना चाहिए।
5. पहले खुशियां मरती हैं, फिर उम्मीदें और डर।
इन सबके मरने के बाद, हम भी मर जाते हैं।
6. खुशी एक बार गुम हो जाए, तो दर्द बन
जाती है।

जो लोग आपकी खामोशी को नहीं समझ सकते, वे आपके कहे शब्दों को भी नहीं समझ पाएंगे।

जो लोग आपकी खामोशी को नहीं समझ सकते, वे आपके कहे शब्दों को भी नहीं समझ पाएंगे।