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Showing posts from March, 2019

क्लोद मोने,Claude Monet

Claude Monet, क्लोद मोने,


एक फ्रेंच पेंटर थे। इनके बनाए लैंडस्केप्स सबसे ज्यादा पसंद किए जाते थे। फ्रेंच इंप्रेशनिस्ट पेंटिंग के संस्थापक भी थे।

1. लोग मेरी कला के बारे में चर्चा करते हैं और उसे समझने का ढोंग करते हैं, जैसे समझना जरूरी है। जरूरी केवल उससे प्रेम करना है।

 2. मैं युवाओं से कहना चाहता हूं कि उन्हें पेंटिंग करनी चाहिए, बिना इस डर के कि वो खराब बनेगी।

 3. यह दुखद है कि हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां शारीरिक साहस आम है, लेकिन नैतिक साहस की कमी है।

4. यदि आप किसी चीज़ को देख और समझ सकते हैं, तो आप उसे कर सकते हैं।

दवा, दुआ और दौलत से स्वयं जुड़ना होगा ( To be connected with medicine, prayer and wealth.)

​​तीन बातें पांच तरीकों से साधी जा सकती
हैं। सुख और दुख सबकी जिंदगी में चलते ही रहते हैं। ये दोनों तीन बातों से जुड़े हैं- दवा, दुआ तथा दौलत और तीनों ही बातें जीवन में अलग-अलग रूप व ढंग से आती रहेंगी। तबीयत खराब हुई, दवा खानी पड़ेगी। समय-समय पर दूसरों की दुआ लेनी पड़ेगी, देनी भी पड़ेगी और दौलत का चक्कर तो चलता ही रहता है। इन तीनों बातों से जो सुख-दुख आता है, उसमें एक बात याद रखिए, ये तीनों काम स्वयं करिए। कुछ लोग तो दवा भी अपने हाथ से नहीं खाते। मैंने कई बार देखा है, पति बीमार है तो लंबे समय तक पत्नी ही दवा देती रहती है।
 एक बार तो मुझे एक भाई साहब ने कहा था कि मुझे तो मालूम भी नहीं है, कौन-सी दवा लेनी है। बस, पत्नी दे देती है, मैं खा लेता हूं। अरे, कम से कम अपनी दवा तो खुद लीजिए। दुआ भी खुद दीजिए और दौलत कमाने में भी अपना परिश्रम, अपनी रुचि बनाए रखिए। दूसरों के कंधे चढ़कर ये तीन काम कभी मत करिएगा। 
                 अब, जब खुद करने उतरेंगे तो फिर आपको पांच बातों पर ध्यान देना पड़ेगा- तरीका, रवैया, शैली, व्यवहार और स्वभाव। इन तीनों कामों में आपका तरीका क्या है? अपना रवैया भी स्पष्ट हो, व्…
पक्ष जानना ज़रूरी है 

विलंब से कार्य करने वाला प्रत्येक व्यक्ति कामचोर नहीं होता उसकी कोई मजबूरी भी हो सकती है।
शिक्षण  क्षेत्र में 35 वर्षों तक अध्यापन कार्य करने के कारण स्वअनुशासन, समय की पाबंदी आदि मानो मेरे स्वभाव में रच बस गए थे। कोई वादा ख़िलाफी करे या कोई काम समय पर न हो तो मैं आपा खो
देती। आदतें कितनी ही अच्छी क्यों न हो वे व्यसन बन जाएं तो व्यक्तित्व में नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करने लगती हैं। रोज़ अख़बार पढ़ने की मेरी आदत व्यसन में कब तब्दील हो गई मुझे पता ही नहीं चला। एक दिन की
बात है रोज़ सुबह 6 बजे आने वाला अख़बार समय पर नहींं आया तो मैं बेचैन हो गई। मेरा मन किसी काम में नहीं लग रहा था।
                         अख़बार वाले को कोसती, चिड़चिड़ाती मैं लगभग 2 घंटे तक गैलरी में ही खड़ी रही। जैसे
ही अख़बार वाला दिखा मेरा गुस्सा फूट पड़ा। मैंने उसे ख़ूब खरी-खोटी सुनाईं। मैं शांत भी न हो पाई थी कि उसकी आंखें भर आईं। रुंधे गले से उसने कहा कि ‘मेरी बेटी 8 दिनों से बुखार में तप रही थी। आधी रात
को तबीयत ज़्यादा ख़राब हो गई तो अस्पताल ले गया। डाक्टर ने भर्ती करवाने को कहा जैसे ही वहां की…

बेहतर प्रदर्शन के लिए, For better performance

बेहतर प्रदर्शन के लिए
For better performance
क्षेत्र कोई भी हो, अपना कार्य बेहतर बनाना हो तो इन आदतों को ग्रहण कर लें। 
If there is any area, you have to improve your work and take these habits. 

1) साफ़-सफ़ाई और भोजन पकाने को ध्यान लगाने का ज़रिया बनाएं। जिस भी चीज़ को साफ़ कर रहे हैं उसे पूरी एकाग्रता के साथ करें। ये ध्यान की तरह कार्य करेगा।
1. Make cleaning and cooking a means of meditation. Do everything you can to clean it with full concentration. It will act like meditation.

2) कोई भी कार्य करें तो उसे पूर्ण किए बिना पीछे न हटें। किसी भी कार्य को अधूरा छोड़ना आपकी नकारात्मक छवि बनाता है।
2. Do any action, do not go back without completing it. Leaving any task incomplete creates your negative image.

3) एक समय पर एक कार्य। यह कार्य के प्रति एकाग्रता बढ़ाएगा तथा उसमें ग़लती की गुंजाइश कम होगी।
3) One task at a time. This will increase the concentration of work and reduce the margin of error.

4) किसी भी कार्य को करने से पहलेये तय करें कि वह कार्य कितना ज़रूरी है। सबसे ज़रूरी, सबसे पहले।

4) Before do…

संसार से योजनाबद्ध विदाई की तैयारी करें( Prepare for Schematic farewell from world )

प्रबंधन के इस युग में बार-बार समझाया जाता है जो भी काम करो, योजनाबद्ध ढंग से करो। यदि योजना, होमवर्क प्रॉपर नहीं है तो नुकसान उठाओगे। कुल-मिलाकर दो वक्त की रोटी कमाना, घर-परिवार चलाना इसका प्रबंधन जीवन का प्रबंधन है। लेकिन, इसमेंं एक बारीक बात और छुपी है जिसके बिना जीवन प्रबंधन अधूरा है, वह है अपनी मृत्यु को भी सुनियोजित कर लें। ध्यान रखिए, इसका अर्थ यह बिलकुल नहीं कि मौत आने की तिथि को आगे-पीछे कर सकें..।
                            ऐसा तो कभी नहीं हो सकेगा। भगवान ने इतने अवतार लेकर बताया है कि मौत को जब आना है, तब ही आएगी। फिर नियोजन किस बात का? दरअसल, जिस दिन मृत्यु आएगी, उस दिन आपकी तैयारी ही आपका सुनियोजित होना है। हमारे यहां अनेक फकीर-महात्माओं ने अपनी मृत्यु को नियोजित किया है। तिथि से कोई छेड़छाड़ नहीं की, लेकिन जिस दिन भी मौत आई, उस तिथि को उन्होंने आयोजन बनाया। 

                               भगवान कृष्ण ने शिकारी के तीर से घायल होकर अपनी मृत्यु को व्यवस्थित किया था। राम ने अपनी मृत्यु को पूर्ण गमन बना दिया। बुद्ध ने इसी को निर्वाण कहा और महावीर ने समाधि बताया। ये सारे तरीके…

जिंदगी का ताला खुला है या बंद ?

कभी-कभी ऐसा होता है कि जिंदगी में समस्या होती नहीं लेकिन हम उसे मान लेते हैं की है। सिर्फ मानने भर से ऐसा लगता है कि हम फंस गए हैं और हम इसे हल नहीं कर पाएंगे।

ओशो एक कहानी सुनाते हैं, एक सम्राट का वजीर मर गया। उस राज्य का नियम था कि जब भी कोई बड़ा वजीर मर जाए तो उस पद के लिए सारे राज्य में से श्रेष्ठतम बुद्धिमान आदमी खोजा जाए। तीन आदमी खोजे गए। वे राजधानी लाए गए अंतिम परीक्षा के लिए। पूरे गांव में चर्चाथी कि परीक्षा यह है कि राजा ने एक कमरा बनाया है और उसमें एक अद्भुत ताला लगाया है। वह ताला एक गणित की पहेली है, जो उस पर खुदी हुई है। जो सबसे पहले उसको हल कर लेगा वह ताला खोल लेगा। उनमें से दो लोग बहुत गणित बिठाने लगे, इंजीनियर के पास सीखकर आए थे, रात भर व्यस्त और त्रस्त रहे। लेकिन एक आदमी रात भर सोया रहा।

 वह जो रात भर सोया रहा वह सुबह एक कोने में आंख बंद करके बैठ गया, शायद भीतर से कोई उत्तर आए। कुछ देर बाद राजा भीतर आया, उसने कहा, बंद करो यह हिसाब-किताब, जिसको निकलना था वह निकल चुका। उन्होंने कहा, कैसे निकला वह? राजा ने कहा, ताला लगा ही नहीं था, सिर्फ दरवाजा अटका था। पहेली वगैरह सिर्फ …

क्यों मिलिनेयर्स से ज्यादा सफल होते हैं बिलिनेयर

किसी भी आम इंसान के लिए एक मिलिनेयर और बिलिनेयर में ज्यादा फर्क नहीं होता है। दोनों के ही आमतौर पर आंत्रप्रेन्योर होने के कारण इनमें समानता लगना स्वाभाविक भी है। लेकिन सच यह है कि दोनों में बहुत बड़ा फर्क है आखिर एक बिलियन में 1,000 मिलियन जो होते हैं। क्या आप भी जानना चाहते हैं कि वह कौनसे फैक्टर्स हैं जो एक बिलिनेयर को किसी मिलिनेयर से 1,000 गुना अधिक सफल बनाते हैं।


लक्ष्य और प्रतिबद्धता  बिलिनेयर्स की नजरें ऊंचे लक्ष्य पर होती हैं। जैसे एक आंत्रप्रेन्योर को किसी बड़ी कंपनी से 15 मिलियन डॉलर में उसकी कंपनी के अधिग्रहण का प्रस्ताव मिलने पर हो सकता है वह उसे स्वीकार कर जल्दी रिटायरमेंट ले ले, वहीं दूसरा आंत्रप्रेन्योर उसे अस्वीकार कर आगे जाकर बिलिनेयर बनने की सफल कोशिश करे।
बिजनेस का पैमाना  यदि मुनाफे को ध्यान में रखें तो जितनी अधिक लोकेशन्स पर आपका बिजनेस पहुंचेगा, उतने ही अधिक अवसर उसके मुनाफा कमाने के होंगे। जैसे, एक छोटे इलाके में रेस्टोरेंट्स की चेन खोलने वाला व्यक्ति मिलिनेयर तो बन सकता है, पर बिलिनेयर बनने के लिए उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करना होगा।

आज आपके पास क्या है.. लिख डाले

हम सबका ध्यान अपने जीवन की खुशियों या अवसरों के बजाय कमियों और समस्याओं पर ज्यादा होता है। मैं यह बात अपने अनुभव से कह रहा हूं क्योंकि हर महीने औसतन लगभग पचास हज़ार लोगों से मेरी बातचीत होती है।
                एक प्रोफेसर क्लास में गए और उन्होंने दीवार पर बहुत बड़ा सफेद रंग का कागज लगाया जिसके बीच एक छोटा-सा काला धब्बा लगा हुआ था। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से कहा कि इस कागज में जो भी नजर आ रहा हो, उस पर टिप्पणी करें। आश्चर्य की बात यह है कि तीस विद्यार्थियों में से अट्ठाईस ने उस काले धब्बे के बारे में लिखा और उस विशाल सफेदी का जिक्र तक नहीं किया। 
                                       सफलता पर आधारित हमारे प्रोग्राम में हम कृतज्ञता की एक अद्भुत गतिविधि करते हैं। इस गतिविधि में सभी को एक पेपर पर उन चीजों की सूची बनानी पड़ती है, जिनके लिए वे कृतज्ञ यानी आभारी हैं। कोई ऐसी चीज़ जिससे दुनिया में कोई न कोई वंचित है, जैसे मेरे पास आंखें हैं, सोचने के लिए दिमाग है, घर है, परिवार है, मैं पढ़ाई कर पाया, मैं अपने हाथों से काम कर सकता हूं और पैरों से चल सकता हूं, मेरे पास टीवी है, मोबाइल है, बाइक ह…

तीन कड़वी बातें जो आपका जीवन बदल देंगी

तीन कड़वी बातें जो आपका जीवन बदल देंगी
जीवन में खुद को आगे बढ़ाना हो तो कई बार "ना' कहना भी जरूरी होता है। कई बार कुछ कड़वी बातें भी बोलनी होती हैं। दीवार में जब कील ठोंकनी हो तो दीवार से प्रेम दिखाने से काम नहीं चलता। उस वक्त उस पर हथौड़ी से ज़ोर से प्रहार करना ही पड़ता है। यदि शरीर में कोई बड़ी बीमारी हो तो मीठी दवाई से काम नहीं चलता। उस वक्त सीधा इंजेक्शन लगाना पड़ता है या सर्जरी करनी पड़ती है। इसलिए जो मैं कहने जा रहा हूं, वे बातें आपको चुभ सकती हैं लेकिन कहना ज़रूरी है क्योंकि ज़्यादा मीठी बातें दिमाग के अंदर नहीं जाती।  पहली बात: किनसे सलाह लें
 दुनिया में सिर्फ उनसे सलाह लो, जो बहुत सफल हुए हैं या उनसे सलाह जो बहुत असफल हुए हैं। सफल होने वाला व्यक्ति यह बताएगा कि सफल कैसे होते हैं और असफल होने वाला व्यक्ति यह बताएगा कि कौन-सी गलतियां असफलता की ओर ले जाती हैं जो हमें नहीं करनी चाहिए। अपने बड़े सपनों के लिए सिर्फ उनसे सलाह लो जिनकी मानसिक हैसियत सलाह देने की हो। महाभारत में सबसे बड़ा रोल सलाहकार का ही था। पांडवों के सलाहकार भगवान श्रीकृष्ण थे और कौरवों के शकुनि। इसकी वजह से पूरा परिण…

इन 7 वजहों से पति-पत्नी के रिश्तों में पड़ती है दरार

इन 7 वजहों से पति-पत्नी के रिश्तों में पड़ती है दरार क्या आपके वैवाहिक जीवन में भी दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन समाधान कैसे निकालें, इसका रास्ता नहीं सूझ रहा है? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कई बार यही पता नहीं चल पाता है कि समस्या की असल वजह क्या है। तो सबसे पहले तो इस वजह को समझना जरूरी है ताकि उसके अनुसार मैरिज काउंसलर आपकी मदद कर सकें। आइए जानते हैं कि किन वजहों से वैवाहिक रिश्ते में दरार पड़ती है और इसमें काउंसलर किस तरह मददगार हो सकते हैं :
पारस्परिक संवाद की कमी :  हर रिश्ते की सबसे अहम बुनियाद होता है पारस्परिक संवाद या कम्युनिकेशन। यह एक सर्वविदित तथ्य है कि संवादहीनता की वजह से ही रिश्ते में समस्या पैदा होती है। यहां काउंसलर दोनों पार्टनर को अपने-अपने दायरे से बाहर निकलकर अपनी भावनाओं को कम्युनिकेट करने में मदद कर सकता है।   सुरक्षित वातावरण का अभाव :  कई बार आप खुद को इस भय से कम्युनिकेट नहीं कर पाते हैं कि कोई या आपका पार्टनर आपको जज कर रहा है। इस असुरक्षित वातावरण के कारण भी धीरे-धीरे वैवाहिक रिश्ते में तनाव पैदा होने लगता है। काउंसलर अपने काउंसिलिंग सेशन्स के जरिए इस तरह का वातावर…

कुछ यादें

कुछ यादेंकुछ यादें साथ लाई,
कुछ तुम्हारे पास छोड़ आई हूं।
वो पहेलियां  जो एक-दूसरे से
पूछा करते थे,
जवाब पता होने पर भी
हार मान लेते थे,
वो जीत वहीं छोड़ आई हूं।
वो बातें जो तुमसे करती,
बेमतलब, बेतुकी,
फालतू की बातें,
उनके अंश मैं बुन लाई हूं ।
वो सिलवटें मेरे दुपट्टे की
जिनमें उंगली फंसाकर,
खेला करते थे हम-तुम,
वो खेल का आधा हिस्सा
साथ ले आई हूं ।
वो बारिश की टपकती,
पहली बूंदें,
मुट्ठी में भरकर,
एक-दूसरे को गीला करते,
वो नमी अपने साथ ले आई हूं ।
वो सायकिल का पैडल,
आहिस्ता से पगली कहना,
वो बचपना तुम्हारा,
शरारतें मेरी
सब तुम्हारे पास छोड़ आई हूं।
कुछ यादें साथ लाई,
कुछ तुम्हारे पास छोड़ आई हूं ।

दूसरों के दोष न देखें, गुण देखकर अपनाए

दूसरों के दोष न देखें, गुण देखकर अपनाए. 

सौंदर्य सृष्टि में होना चाहिए और सौजन्य समाज की जरूरत है। सौंदर्य और सृष्टि, ये दोनों पशु के जीवन में भी होते हैं लेकिन, उसे समाज उपलब्ध नहीं है। मनुष्य समाज में रहता है और सृष्टि का उपयोग करता है। इसीलिए इन्सान को सौजन्य और सौंदर्य दोनों का ताल-मेल बैठाना याद होना चाहिए। सौंदर्य वाली बात तो समझ में आती है। अच्छा-सुंदर दिखना, जिस्म का हर भाग खूबसूरत बन जाए, दूसरों को आकर्षित करे तो कहते हैं सौंदर्य उतर गया। लेकिन सौजन्य को थोड़ा समझना पड़ेगा।
                इस शब्द के आस-पास का शब्द है सुजनता, यानी किसी के दोष नहीं देखना और गुण खींचकर ग्रहण कर लेना। इसके लिए एक और प्यारा शब्द है गुणारोपण। इसका भी मतलब है दूसरों के दोषों पर न जाते हुए उनके गुणों को देखा जाए और अपने भीतर उतारा जाए। दूसरों पर दोष नहीं, बल्कि गुण लादिए, क्योंकि किसी को गुण देने से वो ही अच्छाई अपने भीतर और बढ़ने लगती है। सौजन्य को अंग्रेजी में कहा जा सकता है एडजस्टिंग नेचर। हम मनुष्य हैं और समाज में रहते हैं तो मेल-जोल की वृत्ति रखनी ही पड़ती है।                                 यह…