Skip to main content

Posts

Showing posts from April, 2019

एक मजबूत टीम बनाने के लिए हुकूमत की नहीं Leadership की जरूरत है

एक मजबूत टीम बनाने के लिए हुकूमत की नहीं Leadership की जरूरत है.

एक प्रगतिशील प्रेरित टीम बनाने के लिए आपको "बॉस' की तरह सोचना छोड़ना पड़ता है। बॉस निर्णय लेते हैं और आदेश देते हैं। जबकि सफल टीम लीडर्स एक ऐसा माहौल प्रदान करते हैं जिसमें टीम के सदस्यों को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे समस्याओं का स्वयं विश्लेषण करें, सुझाव दें और निर्णय में सहभागी बनें।
                            वे सुनिश्चित करते हैं कि टीम के सदस्य अपने लक्ष्य पहचानें और उन्हें हासिल करने पर केंद्रित रहें। वे टीम के सदस्यों की योग्यताओं व क्षमताओं के विकास का लक्ष्य बनाते हैं। सफल लीडर्स टीम के प्रत्येक सदस्य की शक्तियां व कमजोरियां जानने का समय भी निकालते हैं और हर सदस्य के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए उसके साथ काम करते हैं।
                                                                  वे अपनी टीम को प्रोत्साहित करते हैं कि वे आजीवन सीखने के प्रति समर्पित हों। वे प्रशंसा और पुरस्कार द्वारा टीम के सदस्यों को निजी तौर पर प्रेरित करते हैं।

दुनिया का सबसे ताकतवर शब्द है ‘एक्स्ट्रा’! Extra

दुनिया का सबसे ताकतवर शब्द है ‘एक्स्ट्रा’! Extra
एक जैसे काम के घंटे, एक जैसी शिक्षा, एक जैसे अवसर और एक जैसी शुरुआत करने के बाद भी कुछ लोग क्यों तेजी से तरक्की करते हैं और कुछ लोग क्यों पीछे रह जाते हैं? इसका राज यदि एक शब्द में कहा जाए तो वह है - "एक्स्ट्रा'। आइए इसे एक कहानी के माध्यम से समझते हैं।
                                   एक धनी आदमी के पास एक पुरानी नाव थी। उस व्यक्ति ने एक पेंटर को नाव को सुंदर और आकर्षक बनाने को कहा। पेंटर बेहद मेहनत और लगन से नाव को पेंट करने में तल्लीन हो गया। इसी दौरान उसने देखा कि नाव में एक छेद है। उसने बिना किसी से कुछ कहे ही उस छेद की मरम्मत की और पेंटिंग कर दी। दो- तीन दिन के बाद नाव का मालिक उसके घर आया, उसे खूब सारे कीमती तोहफे दिए और तय पारिश्रमिक से काफी ज्यादा भुगतान भी किया। पेंटर को इस मेहरबानी का कारण समझ में नहीं आया। 

नाव के मालिक ने बताया कि जिस दिन पेंटर अपना काम खत्म कर निकला, उसी दिन उसकी गैरमौजूदगी में उसके बच्चे नाव लेकर निकल गए। घर वापस आने पर वह यह जानकर कांप उठा। उसे पता था कि नाव में छेद है, लेकिन वह बच्चों को यह बतान…

किसी मुस्कान से होती है शांति की शुरूआत

विदेशों में कहावत है कि जब आप मुस्कुराते हैं तो आपकी आधी मुस्कान दूसरे के चेहरे पर होती है, लेकिन लगता है यह कहावत सही नहीं है। आपने अनुभव किया होगा कि जब-जब हम मुस्कुराते हैं, जरूरी नहीं कि सामने वाला मुस्कुराकर उत्तर दे। उसके चहरे पर शिकन भी आ सकती है। फिर यह कैसे संभव है कि मुस्कुराए हम और आधी मुस्कान सामने वाले के चेहरे पर गई।
                                     मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जैसे ही आप मुस्कुराए, 50 प्रतिशत तो आपकी हुई, लेकिन शेष 50 प्रतिशत प्रकृति में घुलकर सामने वाले तक पहुंचती है। यदि उसने स्वीकार नहीं भी की तो भी वह मुस्कान आप उसे दे चूके हैं। उसने नहीं स्वीकारा तो प्रकृति उसे लेकर दूसरों में बांट देती है। इसलिए जब भी मुस्कुराएं, यह मान लें कि आप पूरे संसार का भला कर रहे हैं। किसी एक
या दो व्यक्तियों का रिस्पॉन्स न मिलने पर निराश न होकर मुस्कान जारी रखिए।
                                                                                                            मनुष्य के लिए तो कहा गया है कि उसके मन को मुस्कान से डर लगता है, क्योंकि उसे गलत काम पसंद है। लेकि…

inspirational quotes

यूरिपिडीस जन्म- सलामीस आइलैंड, ग्रीस निधन- मैकेडोनिया
प्राचीन ग्रीक त्रासदी लेखक थे। कुछ पुराने विद्वानों ने इन्हें 95 नाटकों के लिए जिम्मेदार ठहराया है,लेकिन सूदा के अनुसार नाटकों की संख्या 92 थी।

1. गुलाम वो होता है, जो अपना विचार बोल नहीं सकता। 
2. एक वफादार दोस्त दस हजार रिश्तेदारों के बराबर होता है। 
3. हाथ का काम खत्म किए बिना नए कार्य की योजना नहीं बनानी चाहिए। 
4. किस बात पर विश्वास नहीं करना है- यह समझदारी होना ही इंसान की बहुमलू्य विशेषता है। 
5. हर बात पर सवाल कीजिए। कुछ न कुछ जरूर सीखिए। जवाब कभी मत दीजिए।
 6. समझदारी की हमें बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। बुद्धिमानी तकलीफदेय है। 
7. मूर्ख से समझदारी की बात करेंगे तो वो आपको ही मूर्ख समझेगा। 
8. बुद्धिमान लोग शांत जीवन जीते हैं।
 9. तकलीफ में कौन दोस्त, दोस्त रहता है?






सफर में जरूरी हैं ये चुनिंदा एटिकेट्स

सफर में जरूरी हैं ये चुनिंदा एटिकेट्स

 हाल में लंदन की एक अदालत ने एक महिला यात्री को छह महीने जेल की सजा सुनाई। इस महिला ने एयरइंडिया की मुंबई-लंदन उड़ान के क्रू मेंबर्स के साथ बदतमीज़ी की थी। संदेश साफ है। बदतमीज़ी करोगे तो खामियाज़ा भी भुगतोगे। अपनी जानिब-ए-मंजि़ल के सफर पर निकलने से पहले इस बार गौर करें कि आप खुद कैसे को-पैसेंजर हैं। बस, ट्रेन या जहाज़ में अपनी सीट पर ही बैठते हैं न, या इतना फैलकर कि आपकी कुहनी आर्मेरेस्ट की सीमा लांघती है?
                             बस अड्डे, प्लेटफार्म या बोर्डिंग एरिया में बैठें तो बाजू की सीट पर अपना लगेज रखने की बजाय उसे दूसरे यात्रियों के लिए छोड़ते हैं न? मोबाइल पर ज़रा हौले-हौले बात करिए, अजी अपना हाल-ए-दिल दूसरों को क्यों सुनाना। सब्र का दामन थामिए और अपने से आगे वाले यात्री को पहले चढ़ने, उतरने दीजिए। एस्केलेटर पर चलते हुए बाएं, वरना दाएं खड़े रहें। सफर में पूरा घर साथ लेकर चलने की ज़िद अच्छी नहीं। ‘लाइट ट्रैवलर’ बनकर तो देखिए। और बेशऊर पैसेंजर तो हरगिज़ न बनिए। एक्सपीडिया की एयरप्लेन एटिकेट रिपोर्ट,
                                   …

इस बात से मत डरिए कि सामने वाला 'ना' कर देगा

अक्सर हमसे सवाल पूछा जाता है कि आपकी
सफलता का राज क्या है? कुछ लोग पूछते
हैं कि एलन मस्क या वारेन बफे की सफलता का राज
क्या है? ऐसा लगता है मानो हर कोई सफलता के पीछे
का रहस्य ढूंढ रहा है। क्या वाकई सफलता पाना मैथ्स
या केमिस्ट्री के किसी जटिल फॉर्मूले की तरह है या
सच्चाई कुछ और है? यह जानने के लिए एक छोटा-
सा काम कीजिए।

आप एक पेपर और पेन उठाकर पांच ऐसी खूबियां
लिखिए जो किसी भी व्यक्ति में सफलता पाने के
लिए होनी चाहिए। यही कार्य अपने परिवार के अन्य
सदस्यों और मित्रों से भी कराएं। अब सबकी सूची को
ध्यान से मिलाएं। यह देखकर आप अचरज में पड़ जाएंगे
कि अधिकांश लोगों ने एक ही तरह के उत्तर दिए हैं।
हमने अपनी रिसर्च में पाया है कि सबकी सूची में
लगभग 60 से 80 प्रतिशत तक खूबियां एक जैसी रहती
हैं। अधिकांश लोग कड़ी मेहनत, जुनून, प्रतिबद्धता,
टाइम मैनेजमेंट, जवाबदेही, ईमानदारी, सीखने का
जज़्बा जैसे उत्तर लिखते हैं। इसका अर्थ यह है कि
सफलता का कोई गुप्त रहस्य है ही नहीं। तो आज से
सफलता के रहस्य की तलाश बंद कर दीजिए। सिर्फ
दो सिद्धांतों को अपने मन में पक्का कर लीजिए :

पहला सिद्धांत: अपने लक्ष्य का.........…