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Showing posts from May, 2019

मानसिक मजबूती के लिए अपनाये यह आदतें ( These habits adapted for mental strength)

मानसिक मजबूती के लिए अपनाये यह आदतें
जब मुश्किलें आती हैं तो मानसिक रूप से मजबूत लोग जानते हैं कि ये उनके लिए कुछ सबक सिखने का मौका लेकर आयी हैं । यह सबक सफल होने के लिए जरूरी शक्ति प्रदान करते हैं । कुछ खास आदतें आपको भी मानसिक रूप से मजबूत बना सकती हैं - 
कभी हार ना माननाकिसी ने इक बार बॉक्सर मोहमन्द अली से पूछा कि वे दिन में कितने स्टेप्स करते हैं । उनका जवाब था , में तभी गिनना शुरू करता हूँ जब मुझे दर्द होता हैं , क्योंकि उसके बाद की गयी मेहनत ही महत्वपूर्ण होती हैं । यही बात आपकी प्रोफेशनल सफलता पर लागू होती हैं ।  
कठिन फैसले लेना कभी-कभी हमें वे काम करने पड़ते हैं  जो हम नहीं करना चाहते, क्योंकि हमें मालूम होता है दीर्गाविधि में  वे काम हमें लाभ पहुंचाएंगे। ऐसे क्षणों में मानसिक रूप से मजबूत व्यक्ति जानते हैं कि उनके सामने एक ही रास्ता हैं , और वो हैं तुरंत काम पर जुट जाना ।
साथ न होने पर भी आगे बढ़ना  जब आपके पास सहारा हो, तब एक दिशा निर्धारित करना और सवयं में विश्वास करना बहुत आसान है लेकिन  असली परीक्षा  की घड़ी तब आती है जब आप कोई काम कर रहे हैं  और कोई भी आप में  भरोसा न दिखाए । म…

‘सच्चा प्रोफेशनल बनना है तो आज़ादी से सोचना शुरू कर दो’

‘सच्चा प्रोफेशनल बनना है तो आज़ादी से सोचना शुरू कर दो’
‘सकारात्मक बदलाव लाने के लिए, आप जो करते हैं, उसमें आपको अपनी आकांक्षाओं को और बढ़ाना होगा। जैसा कि लेखक सैमुअल जॉनसन ने कहा, ‘हमारी आकांक्षाएं हमारी संभावनाएं हैं।’आकांक्षाएं ऊंची हों तो हमें स्फूर्ति देती हैं, उम्मीद बनाए रखती हैं और निरंतर बढ़ने की राह में आने वाली बाधाओं को दर करने की ताकत देती हैं।  जब भी बदलाव होगा, आप पहले से जमी व्यवस्थाओं, व्यवहार और समाज से गहरे प्रतिरोध का सामना करेंगे। आपके पास अपने विश्वास की हिम्मत और जोखिम लेने की इच्छा होगी। हर समय, आपको अपने फायदे की बजाए लोगों के फायदे को आगे रखना चाहिए। लंबे समय में आपके लिए यह अच्छा होगा। इसका मतलब है कि किसी भी लेन-देन में किसी व्यक्ति के हित के आगे सार्वजनिक संस्थान - देश, राज्य, शहर, कंपनी का हित मानना। आपको अपने सभी लेन-देन में एक सच्चा प्रोफेशनल होना चाहिए। व्यक्तिगत संबंधों को अपने प्रोफेशनल रवैये में रुकावट ना बनने दें। व्यावसायिकता को बौद्धिक स्वतंत्रता की जरूरत है। मैंने ऐसे प्रतिभावान लोगों को देखा है जो अपने मालिकों द्वारा बताया जाना पसंद करते हैं कि…

‘ना’ कहने से घबराना नहीं चाहिए

‘ना’ कहने से घबराना नहीं चाहिए लोगों को अक्सर महसूस होता है कि उन पर काम का ज्यादा बोझ है। अगर आपको लगता है कि आपके पास पहले से ही बहुत काम है और नया नहीं ले सकते हैं तो आपको हर काम स्वीकार करने की जरूरत नहीं है। हो सकता है आपके बॉस को जानकारी ही ना हो कि आप कितनी सारी चीजों पर काम कर रहे हैं। ऐसे में शांत अंदाज में यह स्पष्ट करें कि आप कितना काम कर रहे हैं। बॉस से कहें कि वे आपके कार्योंं की प्राथमिकताएं तय करने में मदद करें। बॉस सुझाव दे सकते हैं कि आप कम महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम छोड़ दें या फिर वो नया काम किसी दूसरे को देने की बात कर सकते हैं। केवल आपके बॉस ही नहीं कोई सहकर्मी भी आपसे अतिरिक्त काम करने के लिए कह सकता है। कोई आपसे मदद मांग सकता है। किसी आग्रह को स्वीकार करने से पहले सोचें कि उसमें कितना समय लगेगा। यदि आप  अति व्यस्त हैं तो विनम्रता से इंकार कर दें।

अपना आत्मविश्वास बढ़ाकर भी एक नई पहचान बनाई जा सकती है

अपना आत्मविश्वास बढ़ाकर भी एक नई पहचान बनाई जा सकती है 
आप अच्छा काम करते हैं लेकिन आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं तो इसका मतलब यह है कि आपके योगदान को पहचान नहीं मिल पा रही है। नतीजे हमेशा ही खुद नहीं बोलते हैं और मैनेजमेंट को कई बार आधी बात ही पता होती है। खुद की काबिलियत दर्शाना आपके करियर के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। अपने बॉस और अन्य लोगों को ये बताते रहना बहुत जरूरी है कि आप जो भी कर रहे हैं उसमें आप दक्ष हैं। आप अपने काम के उदाहरण भी पेश कर सकते हैं। ये सही है कि हर अवसर पर अपनी तरीफ नहीं करनी चाहिए लेकिन ज्यादा नम्र होना भी ठीक नहीं है।आपकी  उपलब्धियां उन्हें जरूर पता होनी चाहिए जिन्हें इनके बारे में जानकारी होना आवश्यक है। अगर आपको यह सहज नहीं लगता है तो खुद से सवाल करें कि आप किस चीज में अच्छे हैं? आपकी सफलताएं क्या हैं? आप कंपनी के लिए मूल्यवान क्यों हैं?

Network Marketing Business Mein Kya Explain kre ?

50 Quotes to Inspire Success in Your Life and Business

1."Success is not final; failure is not fatal: It is the courage to continue that counts." -- Winston S. Churchill 2."It is better to fail in originality than to succeed in imitation." -- Herman Melville 3."The road to success and the road to failure are almost exactly the same." -- Colin R. Davis 4."Success usually comes to those who are too busy to be looking for it." -- Henry David Thoreau 5."Opportunities don't happen. You create them." -- Chris Grosser 6."Don't be afraid to give up the good to go for the great." --John D. Rockefeller 7."I find that the harder I work, the more luck I seem to have." -- Thomas Jefferson 8."There are two types of people who will tell you that you cannot make a difference in this world: those who are afraid to try and those who are afraid you will succeed." -- Ray Goforth 9."Successful people do what unsuccessful people are not willing to do. Don't wish it were ea…

8 IMPORTANT TIPS FOR INVITING PROSPECT FOR NETWORK MARKETING OPPORTUNITY

8 IMPORTANT TIPS FOR INVITING PROSPECT FOR NETWORK MARKETING OPPORTUNITY
Tip # 1: Invite using Mobile Phone It’s always better to use a mobile phone for inviting your prospects, rather trying to invite them face to face. If try to invite them face to face, prospect always tries to take as much information from you, and you will not be able to provide many details then & there. When you invite prospects on the phone & then they ask question / queries, you can simply ask them to meet you & discuss the things more professionally over a table.
Tip # 2: Don’t talk unnecessary stuff while inviting the prospect I would ask you to check the meaning of the word “Invitation” in the dictionary. It only says “inviting someone”. I see many people giving unnecessary information to the prospects while they invite. Telling the company name, products, a business plan is totally not recommended while you are inviting your prospects. Tip # 3: Be Excited, Maintain CURIOSITY & Talk with C…

उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो / राहत इन्दौरी

उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो / राहत इन्दौरी

राहत इन्दौरी »

उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो
खर्च करने से पहले कमाया करो 
ज़िन्दगी क्या है खुद ही समझ जाओगे
बारिशों में पतंगें उड़ाया करो
दोस्तों से मुलाक़ात के नाम पर
नीम की पत्तियों को चबाया करो 
शाम के बाद जब तुम सहर देख लो
कुछ फ़क़ीरों को खाना खिलाया करो 
अपने सीने में दो गज़ ज़मीं बाँधकर
आसमानों का ज़र्फ़ आज़माया करो
चाँद सूरज कहाँ, अपनी मंज़िल कहाँ
ऐसे वैसों को मुँह मत लगाया करो

ये जीवन इक राह नहीं इक दोराहा है

अपनी बेटी ज़ोया के नाम

ये जीवन इक राह नहीं
इक दोराहा है


पहला रस्ता बहुत सरल है
इसमें कोई मोड़ नहीं है
ये रस्ता इस दुनिया से बेजोड़ नहीं है
इस रस्ते पर मिलते हैं रिश्तों के बंधन
इस रस्ते पर चलने वाले 
कहने को सब सुख पाते हैं
लेकिन
टुकड़े टुकड़े होकर 
सब रिश्तों में बंट जाते हैं
अपने पल्ले कुछ नहीं बचता
बचती है बेनाम सी उलझन
बचता है सांसों का ईंधन
जिसमें उनकी अपनी हर पहचान
और उनके सारे सपने
जल बुझते हैं
इस रस्ते पर चलनेवाले
ख़ुद को खोकर जग पाते हैं
ऊपर-ऊपर तो जीते हैं
अंदर-अंदर मर जाते हैं

दूसरा रस्ता बहुत कठिन है
इस रस्ते में कोई किसी के साथ नहीं है

सबसे खतरनाक होता है

सबसे खतरनाक होता है – अवतार सिंह संधू ‘पाश’ मेहनत की लूट सबसे खतरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होती
गद्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे खतरनाक नहीं होती बैठे-बिठाए पकड़े जाना, बुरा तो है
सहमी-सी चुप में जकड़े जाना, बुरा तो है
पर सबसे खतरनाक नहीं होता कपट के शोर में
सही होते हुए भी दब जाना, बुरा तो है
जुगनुओं की लौ में पढ़ना, बुरा तो है
मुट्ठियां भींचकर बस वक्त निकाल लेना, बुरा तो है
सबसे खतरनाक नहीं होता सबसे खतरनाक होता है
मुर्दा शांति से भर जाना
तड़प का न होना सब सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौटकर घर जाना
सबसे खतरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना सबसे खतरनाक वो घड़ी होती है
आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो
आपकी नजर में रुकी होती है
सबसे खतरनाक वो आंख होती है
जो सबकुछ देखती हुई जमी बर्फ होती है
जिसकी नजर दुनिया को मोहब्बत से चूमना भूल जाती है
जो चीजों से उठती अंधेपन की भाप पर ढुलक जाती है
जो रोजमर्रा के क्रम को पीती हुई
एक लक्ष्यहीन दोहराव के उलटफेर में खो जाती है सबसे खतरनाक वो चांद होता है
जो हर क़त्ल, हर कांड के बाद
वीरान हुए आंगन में चढ़ता है
लेकिन आपकी आंखों में मिर्चों की तरह नहीं गड़ता है स…

आप संपत्ति के गुलाम तो नही

आप संपत्ति के गुलाम तो नही
हम संपत्ति के कब गुलाम हो गए, हमें पता ही नहीं चलता। संपत्ति आने के बाद भूल जाते हैं कि जिसका मालिक होना था कब गुलाम बन गए।
इस दुनिया में कोई भी आदमी यदि मालिक बनने की कोशिश करेगा, तो गुलाम हो जाएगा। जीवन का नियम कुछ ऐसा है कि हम जिसके भी मालिक बनना चाहेंगे, उसका हमें गुलाम होना ही पड़ेगा। बिना गुलाम बने मालिक बनने का कोई उपाय नहीं है। क्योंकि जीवन एक रहस्य है, परस्पर निर्भरता है।
एक सूफी फकीर अपने शिष्यों को यह नियम समझा रहे थे और शिष्य समझ नहीं पा रहे थे। तभी एक आदमी अपनी गाय की रस्सी पकड़कर जाते हुए दिखा। फकीर ने पूछा, यहां कौन किससे बंधा हुआ है? शिष्यों ने कहा, जाहिर है, गाय रस्सी के ज़रिये आदमी से बंध है। फकीर उठे और एक झटका देकर उन्होंने गाय को मुक्त कर दिया। गाय तो जोर से दौड़ पड़ी लेकिन वह आदमी चिल्लाता हुआ उसके पीछे भागा, ‘मेरी गाय… मेरी गाय… कोई पकड़ो। अभी खरीद कर लाया हूं।’ गाय को उस आदमी की आदत नहीं थी सो वह भाग गई। लेकिन आदमी के तो पैसे लगे थे। इसे संबंधों में देखिए। घर में नौकर होते हैं लेकिन मालकिन नौकरों पर ज्यादा निर्भर रहती है। क्योंकि वे जो काम क…