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इंसान ने जिन शब्दो के सही अर्थ नहीं समझे, उस में स्त्री, वफादारी, समशानघाट आदि शामिल है

अगर कोई बात मुस्करा कर कही जाए , वो बात समझना आसान हो जाता है 

अपने आप को पहचानो , कहना बड़ा असान होता है , पर अपने आप को पहचानना , बहुत दुखदायी होता है , इस कारण इंसान सारा जीवन अपने आप से छिपता-भागता रहता है

अच्छा दोस्त वो नहीं होता जो आपके लिए अपनी जान देने के लिए त्यार हो , बल्कि अच्छा दोस्त वो होता है , जो आपको भी मरने से बचा ले 

इंसान ने जिन शब्दो के सही अर्थ नहीं समझे, उस में स्त्री, वफादारी, समशानघाट आदि शामिल है 

अगर अंगूठा ना होता , तो जूते के तस्मे नहीं बांधे जाते, गिरा हुआ सिका उठाया नहीं जा सकता , कोई ढकन नहीं था खुलना , सुई में धागा ना पड़ता , कुछ भी पकड़ा - या प्रयोग नहीं होना था । 

बच्चा किसी को पहचानने का संकेत , अपनी मुस्कराहट से देता है ।

हर इंसान की छुट्टी का पहला अनुभव , स्कूल की छुट्टी से प्रपात होता है ।

झूठ नहीं बोलना चाहिए , यह आधा कथन है , बाकी आधा कथन यह है : सच ही बोलना चाहिए ।

चालाक , कामी, बेईमान , धोखेबाज़ का किसी तरह के सच में कोई दिलचस्पी नहीं होती ।

बच्चा आस-पास देख कर हैरान होता है , स्कूल की शिक्षा इस हैरानी को कुचल देती है। 


आत्मा के फैसले के विरोध में कोई अपील संभव नहीं होती । 
कोई पुस्तक पढ़ कर , पाठक को ऐसा लगता है के लेखक ने तो सभी मेरे विचार लिख दिए। 

अगर किसी की अक्ल कमजोर हो , तो उसके पक्षपात मजबूत हो जाते है 



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